| सूक्त 1 | ९ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः । अग्निः। गायत्री। | 9 |
|---|
| सूक्त 2 | ९ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः। १-३ वायुः, ४-६ इन्द्र-वायु, ७-९ मित्रा-वरुणौ। गायत्री। | 9 |
|---|
| सूक्त 3 | १२ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः। १-३ अश्विनौ, ४-६ इन्द्र, ७-९ विश्वेदेवाः, १०-१२ सरस्वती। गायत्री। | 12 |
|---|
| सूक्त 4 | १० मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः। इन्द्रः। गायत्री। | 10 |
|---|
| सूक्त 5 | १० मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः। इन्द्रः। गायत्री। | 10 |
|---|
| सूक्त 6 | १० मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः। १-३ इन्द्रः, ४,६,८,९ मरुतः, ५,७ मरुत इन्द्रश्च, १० इन्द्रः। गायत्री। | 10 |
|---|
| सूक्त 7 | १० मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः। इन्द्रः। गायत्री। | 10 |
|---|
| सूक्त 8 | १० मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः। इन्द्रः। गायत्री। | 10 |
|---|
| सूक्त 9 | १० मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः। इन्द्रः। गायत्री। | 10 |
|---|
| सूक्त 10 | १२ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः। इन्द्रः। अनुष्टुप्। | 12 |
|---|
| सूक्त 11 | ८ जेता माधुच्छन्दसः। इन्द्रः। अनुष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 12 | १२ मेधातिथिः काण्वः। अग्निः,६ प्रथमपादस्य (निर्मथ्याहवनीयौ) अग्नी। गायत्री। | 12 |
|---|
| सूक्त 13 | १२ मेधातिथिः काण्वः।(आप्रीसूक्तं, अग्निरूपा देवता देवताः) १ इध्मः समिद्धोऽग्निर्वा, २ तनूनपात्, ३ नराशंसः, ४ इलः, ५ बर्हिः, ६ देवीर्द्वारः, ७ उषासानक्ता, ८ दैव्यो होतारौ प्रचेतसौ, ९ तिस्रो देव्यः सरस्वतीळाभारत्यः, १० त्वष्टा, ११ वनस्पतिः, १२ स्वाहा कृतयः । गायत्री। | 12 |
|---|
| सूक्त 14 | १२ मेधातिथिः काण्वः। विश्वे देवाः (विश्वैर्देवैः सहितोऽग्निः), ३ इन्द्रवायुबृहस्पतिमित्राग्निपूषभगादित्यमरुद्गणाः, १० विश्वदेवाग्नीन्द्रवायुमित्रधामानि, ११ अग्निः। गायत्री। | 12 |
|---|
| सूक्त 15 | १२ मेधातिथिः काण्वः। (प्रतिदैवतं ऋतुसहितम्), १ इन्द्रः, २ मरुतः, ३ त्वष्टा, ४ अग्निः, ५ इन्द्रः, ६ मित्रावरुणौ, ७-१० द्रविणोदाः, ११ अश्विनौ, १२अग्निः। गायत्री। | 12 |
|---|
| सूक्त 16 | ९ मेधातिथिःकाण्वः। इन्द्रः।गायत्री। | 9 |
|---|
| सूक्त 17 | ९ मेधातिथिः काण्वः। इन्द्रावरुणौ। गायत्री, ४-५ पादनिचृत् (५ ह्रसीयसी वा) गायत्री। | 9 |
|---|
| सूक्त 18 | ९ मेधातिथिःकाण्वः। १-३ ब्रह्मणस्पतिः, ४ इन्द्रो ब्रह्मणस्पतिः सोमश्च, ५ ब्रह्मणस्पतिः सोम इंद्रो, दक्षिणा च, ६-८ सदसस्पतिः, ९ सदसस्पतिर्नराशंसो वा। गायत्री। | 9 |
|---|
| सूक्त 19 | ९ मेधातिथिःकाण्वः। अग्निर्मरुतश्च।गायत्री। | 9 |
|---|
| सूक्त 20 | ८ मेधातिथिः काण्वः। ऋभवः।गायत्री। | 8 |
|---|
| सूक्त 21 | ६ मेधातिथिः काण्वः। इन्द्राग्नी। गायत्री। | 6 |
|---|
| सूक्त 22 | २१ मेधातिथिः काण्वः। १-४ अश्विनौ, ५-८ सविता, ९-१० अग्निः, ११ देव्यः, १२ इन्द्राणी वरुणान्यग्नाय्यः, १३-१४ द्यावापृथिव्यौ, १५ पृथिवी, १६ विष्णुर्देवा वा, १७-२१ विष्णुः। गायत्री। | 21 |
|---|
| सूक्त 23 | २४ मेधातिथिः काण्वः। १ वायुः, २-३ इन्द्र वायू, ४-६ मित्रावरुणौ, ७-९ इन्द्रो मरुत्वान्, १०-१२ विश्वे देवाः, १३-१५ पूषा, १६-२२, २३(पूर्वार्धस्य) आपः, २३(उत्तरार्धस्य), २४ अग्निः। १-१८ गायत्री, १९ पुर उष्णिक्, २१ प्रतिष्ठा, २०, २२-२४ अनुष्टुप्।॥ ती॒व्राः सोमा॑स॒ आ ग॑ह्या॒शीर्व॑न्तः सु॒ता इ॒मे । वायो॒ तान्प्रस्थि॑तान्पिब | 24 |
|---|
| सूक्त 24 | १५ आजीगर्तिः शुनः शेपः स कृत्रिमो वैश्वामित्रो देवरातः।१ कः (प्रजापतिः), २ अग्निः, ३-५ सविता, ५ भगो वा, ६-१५ वरुणः।१, २, ६-१५ त्रिष्टुप्, ३-५ गायत्री। | 15 |
|---|
| सूक्त 25 | २१ आजीगर्तिः शुनः शेपः स कृत्रिमो वैश्वामित्रो देवरातः। वरुणः। गायत्री। यच्चि॒द्धि ते॒ विशो॑ यथा॒ प्र दे॑व वरुण व्र॒तम् । मि॒नी॒मसि॒ द्यवि॑द्यवि | 21 |
|---|
| सूक्त 26 | १० आजीगर्तिः शुनःशेप स कृत्रिमो वैश्वामित्रो देवरातः। अग्निः,। गायत्री। | 10 |
|---|
| सूक्त 27 | १३ आजीगर्तिः शुनःशेप स कृत्रिमो वैश्वामित्रो देवरातः। १-१२अग्निः, १३देवाः।।१-१२ गायत्री, १३ त्रिष्टुप्। | 13 |
|---|
| सूक्त 28 | ९ आजीगर्तिः शुनःशेप स कृत्रिमो वैश्वामित्रो देवरातः। १-४ इन्द्रः, ५-६ उलू खलं, ७-८ उलूखल मुसले, ९ प्रजापतिर्हरि श्चन्द्रः, (अधिषवण) चर्म सोमो वा। १-६ अनुष्टुप्, ७-९ गायत्री। | 9 |
|---|
| सूक्त 29 | ७ आजीगर्तिः शुनःशेप स कृत्रिमो वैश्वामित्रो देवरातः। इन्द्रः। पंक्ति। | 7 |
|---|
| सूक्त 30 | २२ आजीगर्तिः शुनःशेप स कृत्रिमो वैश्वामित्रो देवरातः। १-१६ इन्द्रः, १७-१९ अश्विनौ, २०-२२ उषाः।१-१०, १२-१५, १७-२२ गायत्री, ११ पादनिचृद्गायत्री, १६ त्रिष्टुप्। | 22 |
|---|
| सूक्त 31 | १८ हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः। अग्निः। जगती, ८, १६, १८ त्रिष्टुप्। | 18 |
|---|
| सूक्त 32 | १५ हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 15 |
|---|
| सूक्त 33 | १५ हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 14 |
|---|
| सूक्त 34 | १२ हरिण्यस्तूप आङिरसः। अश्विनौ। जगती, ९-,१२ त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 35 | ११ हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः। १ (पादानां क्रमेण) अग्निः, मित्रावरुणौ, रात्रिः, सविता च। २-११ सविता। त्रिष्टुप्, १, ९ जगती। | 10 |
|---|
| सूक्त 36 | २० कण्वो घौरः। अग्निः, १३-१४ यूपो वा। प्रगाथः – विषमा बृहत्यः, समाः सतोबृहंत्यः (१३ उपरिष्टाद् बृहती। ऐ० ब्रा० २-२ चरणच्छेदः) | 20 |
|---|
| सूक्त 37 | १५ कण्वो घौरः। मरुतः। गायत्री। | 15 |
|---|
| सूक्त 38 | १५ कण्वो घौरः। मरुतः। गायत्री। | 15 |
|---|
| सूक्त 39 | १० कण्वौ घौरः। मरुतः। प्रगाथः – विषमा बृहत्यः, समाः सतोबृहत्यः। | 10 |
|---|
| सूक्त 40 | ८ कण्वो घौरः। ब्रह्मणस्पतिः। प्रगाथः – विषमा बृहत्यः, समाः सतोबृहत्यः। | 8 |
|---|
| सूक्त 41 | ९ कण्वो घौरः। वरुणमित्रार्यमणः, ४-६ आदित्याः। गायत्री। | 9 |
|---|
| सूक्त 42 | १० कण्वो घौरः। पूषा। गायत्री। | 10 |
|---|
| सूक्त 43 | ९ कण्वो घौरः। रुद्रः, मित्रावरुणौ च, ७-९ सोमः। गायत्री, ९ अनुष्टप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 44 | १४ प्रस्कण्वः काण्वः। अग्निः, १-२ अग्निः, अश्विनौ, उषाश्च। प्रगाथः – विषमा बृहत्यः, समाः सतोबृहत्यः। | 14 |
|---|
| सूक्त 45 | १० प्रस्कण्वः काण्वः। अग्निः, १० (उत्तरार्धस्य) देवाः। अनुष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 46 | १५ प्रस्कण्वः काण्वः। अश्विनौ। गायत्री। | 15 |
|---|
| सूक्त 47 | १० प्रस्कण्वः काण्वः। अश्विनौ। प्रगाथः – विषमा बृहत्यः, समा सतोबृहत्यः। | 10 |
|---|
| सूक्त 48 | १६ प्रस्कण्वः काण्वः। उषाः। प्रगाथः – विषमा बृहत्यः, समाः सतोबृहत्यः। | 16 |
|---|
| सूक्त 49 | ४ प्रस्कण्वः काण्वः। उषाः। अनुष्टुप्। | 4 |
|---|
| सूक्त 50 | १३ प्रस्कण्वः काण्वः। सूर्यः (११-१३ रोगघ्न्य उपनिषदः, १३ अन्त्योऽर्धर्चः द्विषद् घ्नश्च)। गायत्री, १०-१३ अनुष्टुप्। | 13 |
|---|
| सूक्त 51 | १५ सव्य आङ्गिरसः। इन्द्रः। जगती, १४-१५ त्रिष्टुप्। | 15 |
|---|
| सूक्त 52 | १५ सव्य आङ्गिरसः। इन्द्रः। जगती, १३-१५ त्रिष्टुप्। | 15 |
|---|
| सूक्त 53 | ११ सव्य आङ्गिरसः। इन्द्रः। जगती, १०-११ त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 54 | ११ सव्य आङ्गिरसः। इन्द्रः। जगती, ६, ८-९, ११ त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 55 | ८ सव्य आङ्गिरसः। इन्द्रः। जगती। | 8 |
|---|
| सूक्त 56 | ६ सव्य आङ्गिरसः। इन्द्रः। जगती। | 6 |
|---|
| सूक्त 57 | ६ सव्य आङ्गिरसः। इन्द्रः। जगती। | 6 |
|---|
| सूक्त 58 | ९ नोधा गौतमः। अग्निः। जगती, ६-९ त्रिष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 59 | ७ नोधा गौतमः। अग्निर्वैश्वानरः।त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 60 | ५ नोधा गौतमः। अग्निः।त्रिष्टुप्। | 5 |
|---|
| सूक्त 61 | १६ नोधा गौतमः। इन्द्रः।त्रिष्टुप्। | 16 |
|---|
| सूक्त 62 | १३ नोधा गौतमः। इन्द्रः।त्रिष्टुप्। | 13 |
|---|
| सूक्त 63 | ९ नोधा गौतमः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 64 | १५ नेधा गौतमः। मरुतः। जगती, १५ त्रिष्टुप्। | 15 |
|---|
| सूक्त 65 | १० पराशरः शाक्त्यः। अग्निः। द्विपदा विराट्। | 10 |
|---|
| सूक्त 66 | १० पराशरः शाक्त्यः। अग्निः। द्विपदा विराट्। | 5 |
|---|
| सूक्त 67 | १० पराशरः शाक्त्यः। अग्निः। द्विपदा विराट्। | 5 |
|---|
| सूक्त 68 | १० पराशरः शाक्त्यः। अग्निः। द्विपदा विराट्। | 10 |
|---|
| सूक्त 69 | १० पराशरः शाक्त्यः। अग्निः। द्विपदा विराट्। | 10 |
|---|
| सूक्त 70 | ११ पराशरः शाक्त्यः। अग्निः। द्विपदा विराट्। | 11 |
|---|
| सूक्त 71 | १० पराशरः शाक्त्यः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 72 | १० पराशरः शाक्त्यः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 73 | १० पराशरः शाक्त्यः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 74 | ९ गोतमो राहूगणः। अग्निः। गायत्री। | 9 |
|---|
| सूक्त 75 | ५ गोतमो राहूगणः। अग्निः। गायत्री। | 5 |
|---|
| सूक्त 76 | ५ गोतमो राहूगणः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 5 |
|---|
| सूक्त 77 | ५ गोतमो राहूगणः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 5 |
|---|
| सूक्त 78 | ५ गोतमो राहूगणः। अग्निः। गायत्री। | 5 |
|---|
| सूक्त 79 | १२ गोतमो राहूगणः। १-३अग्निः मध्यमोऽ ग्निर्वा, ४-१२ अग्निः। १-३ त्रिष्टुप्, ४-६ उष्णिक्, ७-१२ गायत्री । | 12 |
|---|
| सूक्त 80 | १६ गोतमो राहूगणः। इन्द्रः, १६ इन्द्रः, (अथर्वा, मनुः दध्यङ् च)। पंक्तिः। | 16 |
|---|
| सूक्त 81 | ९ गोतमो राहूगणः। इन्द्रः। पंक्तिः। | 9 |
|---|
| सूक्त 82 | ६ गोतमो राहूगणः। इन्द्रः। पंक्तिः, ६ जगती। | 6 |
|---|
| सूक्त 83 | ६ गोतमो राहूगणः। इन्द्रः। जगती। | 6 |
|---|
| सूक्त 84 | २० गोतमो राहूगणः। इन्द्रः। १-६ अनुष्टप्, ७-९ उष्णिक्, १०-१२ पंक्तिः, १३-१५गायत्री, १६-१८ त्रिष्टुप्(प्रगा थः-) १९ बृहती, २० सतोबृहती। | 20 |
|---|
| सूक्त 85 | १२ गोतमो राहूगणः। मरुतः। जगती, ५, १२ त्रिष्टुप्। | 12 |
|---|
| सूक्त 86 | १० गोतमो राहूगणः। मरुतः। गायत्री। | 10 |
|---|
| सूक्त 87 | ६ गोतमो राहूगणः। मरुतः। जगती। | 6 |
|---|
| सूक्त 88 | ६ गोतमो राहूगणः। मरुतः। त्रिष्टुप्, १, ६ प्रस्तारपंक्तिः, ५ विराड् रुपा। | 6 |
|---|
| सूक्त 89 | १० गोतमो राहूगणः। विश्वेदेवाः, (१-२, ८-९ देवाः, १० अदितिः)। जगती, ६ विराट्-स्थाना, ८-१० त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 90 | ९ गोतमो राहूगणः। विश्वेदेवाः,। गायत्री, ९ अनुष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 91 | २३ गोतमो राहूगणः। सोमः। त्रिष्टुप्, ५-१६ गायत्री, १७ उष्णिक्। | 23 |
|---|
| सूक्त 92 | १८ गोतमो राहूगणः। उषाः, १६-१८ अश्विनौ । १-४ जगती, ५-१२ त्रिष्टुप्, १३-१८ उष्णिक्। | 18 |
|---|
| सूक्त 93 | १२ गोतमो राहूगणः। अग्निषोमौ। १-३ अनुष्टुप्, ४-७, १२ त्रिष्टुप्, ८ जगती त्रिष्टुब्वा, ९-११ गायत्री । | 12 |
|---|
| सूक्त 94 | १६ कुत्स आङ्गिरसः। अग्निः(जातवेदाः), ८ (त्रयः पादाः) देवाः, १६ उत्तरार्धस्य अग्निः, मित्रवरुणादितिसिन्धु पृथिवीद्यावो वा। जगती, १५-१६ त्रिष्टुप् । | 16 |
|---|
| सूक्त 95 | ११ कुत्स आङ्गिरसः। अग्निः, औषसोऽग्निर्वा । त्रिष्टुप् | 11 |
|---|
| सूक्त 96 | ९ कुत्स आङ्गिरसः। अग्निः, द्रविणोदा अग्निर्वा। त्रिष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 97 | ८ कुत्स आङ्गिरसः। अग्निः, शुचिरग्निर्वा। गायत्री। | 8 |
|---|
| सूक्त 98 | ३ कुत्स आङ्गिरसः। अग्निः, वैश्वानरोऽग्निर्वा । त्रिष्टुप्। | 3 |
|---|
| सूक्त 99 | १ कश्यपो मारीचः। अग्निः, जातवेदा अग्निर्वा। त्रिष्टुप्। | 1 |
|---|
| सूक्त 100 | १९ वार्षागिराः ऋज्रा श्वाऽम्बरीष-सहदेव-भयमान-सुराधसः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 18 |
|---|
| सूक्त 101 | ११ कुत्स आङ्गिरसः। इन्द्रः (१ गर्भस्रावि ण्युपनिषद्)। जगती, ८-११ त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 102 | ११ कुत्स आङ्गिरसः। इन्द्रः। जगती, ११ त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 103 | ८ कुत्स आङ्गिरसः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 104 | ९ कुत्स आङ्गिरसः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 105 | १९ त्रित आप्त्यः, कुत्स आङ्गिरसो वा। विश्वे देवाः। पंक्तिः, ८ यव मध्य महाबृहती, १९ त्रिष्टुप्। | 19 |
|---|
| सूक्त 106 | ७ कुत्स आङ्गिरसः। विश्वे देवाः। जगती, ७ त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 107 | ३ कुत्स आङ्गिरसः। विश्वे देवाः। त्रिष्टुप्। | 3 |
|---|
| सूक्त 108 | १३ कुत्स आङ्गिरसः। इन्द्राग्नी। त्रिष्टुप्। | 13 |
|---|
| सूक्त 109 | ८ कुत्स आङ्गिरसः। इन्द्राग्नी। त्रिष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 110 | ९ कुत्स आङ्गिरसः। ऋभवः। जगती, ५, ९ त्रिष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 111 | ५ कुत्स आङ्गिरसः। ऋभवः।जगती, ५ त्रिष्टुप्। | 5 |
|---|
| सूक्त 112 | २५ कुत्स आङ्गिरसः। १(आद्यपादस्य) द्यावापृथिव्यौ, १(द्विती यपादस्य) अग्निः, १ (उत्तरार्धस्य) अश्विनौ, २-२५ अश्विनौ। जगती, २४-२५ त्रिष्टुप्। | 25 |
|---|
| सूक्त 113 | २० कुत्स आङ्गिरसः। १उषाः (उत्तरार्धस्य) रात्रिश्च, २-२० उषाः। त्रिष्टुप्। | 20 |
|---|
| सूक्त 114 | ११ कुत्स आङ्गिरसः। रुद्रः। जगती, १०-११ त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 115 | ६ कुत्स आङ्गिरसः। सूर्यः। त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 116 | २५ कक्षीवान् दैर्घतमस औशिजः। अश्विनौ। त्रिष्टुप्। | 25 |
|---|
| सूक्त 117 | २५ कक्षीवान् दैर्घतमस औशिजः। अश्विनौ। त्रिष्टुप्। | 25 |
|---|
| सूक्त 118 | ११ कक्षीवान् दैर्घतमस औशिजः। अश्विनौ। त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 119 | १० कक्षीवान् दैर्घतमस औशिजः। अश्विनौ। जगती। | 10 |
|---|
| सूक्त 120 | १२ कक्षीवान् दैर्घतमस औशिजः। अश्विनौ। (१२ दुःस्वप्ननाशनम्) ।१ गायत्री, २ ककुप्, ३ का- विराट्, ४ नष्टरूपी, ५ तनुशिरा, ६ उष्णिक्, ७ विष्टार-बृहती, ८ कृतिः, ९ विराट्, १०-१२ गायत्री। | 12 |
|---|
| सूक्त 121 | १५ कक्षीवान् दैर्घतमस औशिजः। इन्द्रो विश्वे देवा वा। त्रिष्टुप्। | 15 |
|---|
| सूक्त 122 | १५ कक्षीवान् दैर्घतमस औशिजः। विश्वे देवाः । त्रिष्टुप्,- ५-६ विराड् रूपा। | 15 |
|---|
| सूक्त 123 | १३ कक्षीवान् दैर्घतमस औशिजः। उषाः । त्रिष्टुप्। | 13 |
|---|
| सूक्त 124 | १३ कक्षीवान् दैर्घतमस औशिजः। उषाः । त्रिष्टुप्। | 13 |
|---|
| सूक्त 125 | ७ कक्षीवान् दैर्घतमस औशिजः। स्वनयस्य दानस्तुतिः। त्रिष्टुप्, ४-५ जगती। | 7 |
|---|
| सूक्त 126 | ७ कक्षीवान् दैर्घतमस औशिजः। (६) स्वनयो भावयव्यः, (७) रोमशा। १-५ स्वनयो भावयव्यः, ६ रोमशा, ७ स्वनयो भावयव्यः। त्रिष्टुप्, ६-७ अनुष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 127 | ११ परुच्छेपो दैवोदासिः । अग्निः। अत्यष्टिः, ६ अतिधृतिः। | 11 |
|---|
| सूक्त 128 | ८ परुच्छेपो दैवोदासिः । अग्निः। अत्यष्टिः। | 8 |
|---|
| सूक्त 129 | ११ परुच्छेपो दैवोदासिः । इन्द्रः, इन्दुः।अत्यष्टिः, ८-९ अतिशक्वर्यौ, ११अष्टिः। | 11 |
|---|
| सूक्त 130 | १० परुच्छेपो दैवोदासिः । इन्द्रः। अत्यष्टिः, १० त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 131 | ७ परुच्छेपो दैवोदासिः । इन्द्रः। अत्यष्टिः। | 7 |
|---|
| सूक्त 132 | ६ परुच्छेपो दैवोदासिः । इन्द्रः, ६ (१अर्धर्चस्य) इन्द्रापर्वतौ। अत्यष्टिः। | 6 |
|---|
| सूक्त 133 | ७ परुच्छेपो दैवोदासिः । इन्द्रः।१ त्रिष्टुप्, २-४ अनुष्टुप्, ५ गायत्री, ६ धृतिः, ७ अष्टिः। | 7 |
|---|
| सूक्त 134 | ६ परुच्छेपो दैवोदासिः । वायुः। अत्यष्टिः, ६ अष्टिः। | 6 |
|---|
| सूक्त 135 | ९ परुच्छेपो दैवोदासिः । १-३, ९ वायुः, ४-८ इन्द्रवायू। अत्यष्टिः, ७-८ अष्टिः। | 9 |
|---|
| सूक्त 136 | ७ परुच्छेपो दैवोदासिः। १-५ मित्रावरुणौ, ६-७ लिङ्गोक्ताः। अत्यष्टिः, ७ त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 137 | ३ परुच्छेपो दैवोदासिः। मित्रावरुणौ।अतिशक्वरी। | 3 |
|---|
| सूक्त 138 | ४ परुच्छेपो दैवोदासिः। पूषा। अत्यष्टिः। | 4 |
|---|
| सूक्त 139 | ११ परुच्छेपो दैवोदासिः । १ विश्वे देवाः, २ मित्रा वरुणौ, ३-५ अश्विनौ, ६ इन्द्रः, ७ अग्निः, ८ मरुतः, ९ इन्द्राग्नी, १० बृहस्पतिः, ११ विश्वे देवाः। अत्यष्टिः, ५ बृहती, ११ त्रिष्टुप् | 10 |
|---|
| सूक्त 140 | १३ दीर्घतमा औचथ्यः। अग्निः। जगती, १० त्रिष्टुब्वा, १२-१३ त्रिष्टुप्। | 13 |
|---|
| सूक्त 141 | १३ दीर्घतमा औचथ्यः। अग्निः। जगती, १२-१३ त्रिष्टुप्। | 13 |
|---|
| सूक्त 142 | १३ दीर्घतमा औचथ्यः। (आप्रीसूक्तं)-१ इध्मः समिद्धोऽग्निर्वा, २ तनून पात्, ३ नराशंसः, ४ इळः, ५ बर्हिः, ६ देवीः द्वारः, ७ उषासानक्ता ८ दैव्यो होतारौ प्रचेतसौ, ९ तिस्रो देव्यः सरस्वतीळा भारत्यः, १० त्वष्टा, ११ वनस्पतिः, १२ स्वाहा कृतयः, १३ इन्द्रः। अनुष्टुप्। | 13 |
|---|
| सूक्त 143 | ८ दीर्घतमा औचथ्यः। अग्निः। जगती, ८ त्रिष्टुप् । | 8 |
|---|
| सूक्त 144 | ७ दीर्घतमा औचथ्यः। अग्निः। जगती। | 7 |
|---|
| सूक्त 145 | ५ दीर्घतमा औचथ्यः। अग्निः। जगती, ५ त्रिष्टुप् । | 5 |
|---|
| सूक्त 146 | ५ दीर्घतमा औचथ्यः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 5 |
|---|
| सूक्त 147 | ५ दीर्घतमा औचथ्यः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 5 |
|---|
| सूक्त 148 | ५ दीर्घतमा औचथ्यः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 5 |
|---|
| सूक्त 149 | ५ दीर्घतमा औचथ्यः। अग्निः। विराट्। | 5 |
|---|
| सूक्त 150 | ३ दीर्घतमा औचथ्यः। अग्निः। उष्णिक्। | 3 |
|---|
| सूक्त 151 | ९ दीर्घतमा औचथ्यः। १ मित्रः, २-९ मित्रावरुणौ। जगती। | 9 |
|---|
| सूक्त 152 | ७ दीर्घतमा औचथ्यः। मित्रावरुणौ। त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 153 | ४ दीर्घतमा औचथ्यः। मित्रावरुणौ। त्रिष्टुप्। | 4 |
|---|
| सूक्त 154 | ६ दीर्घतमा औचथ्यः। विष्णुः। त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 155 | ६ दीर्घतमा औचथ्यः। विष्णुः।१-३ इन्द्राविष्णू। जगती। | 6 |
|---|
| सूक्त 156 | ५ दीर्घतमा औचथ्यः। विष्णुः। जगती। | 5 |
|---|
| सूक्त 157 | ६ दीर्घतमा औचथ्यः। अश्विनौ। जगती, ५-६ त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 158 | ६ दीर्घतमा औचथ्यः। अश्विनौ।त्रिष्टुप्, ६ अनुष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 159 | ५ दीर्घतमा औचथ्यः। द्यावापृथिवी। जगती। | 5 |
|---|
| सूक्त 160 | ५ दीर्घतमा औचथ्यः। द्यावापृथिवी। जगती। | 5 |
|---|
| सूक्त 161 | १४ दीर्घतमा औचथ्यः। ऋभवः।जगती, १४ त्रिष्टुप्। | 14 |
|---|
| सूक्त 162 | २२ दीर्घतमा औचथ्यः। अश्वः। त्रिष्टुप्, ३-६ जगती। | 22 |
|---|
| सूक्त 163 | १३ दीर्घतमा औचथ्यः। अश्वः। त्रिष्टुप्। | 13 |
|---|
| सूक्त 164 | ५२ दीर्घतमा औचथ्यः। १-४१ विश्वे देवाः, ४२ आद्यर्धर्चस्य वाक्, द्वितीयस्य आपः, ४३ आद्यर्धर्चस्य शकधूमः, द्वितीयस्य सोमः, ४४ केशिनः (अग्निः सूर्यो वायुश्च,) ४५ वाक्, ४६-४७ सूर्यः, ४८ संवत्सर कालचक्रम्,४९ सरस्वती, ५० साध्याः, ५१ सूर्यः, पर्जन्याग्नयो वा, ५२ सरस्वान्, सूर्यो वा। त्रिष्टुप् १२, १५, २३, २९, ३६, ४१ जगती, ४२ प्रस्तार पंक्तिः, ५१ अनुष्टप्। | 52 |
|---|
| सूक्त 165 | (१५) १,२,४,६,८,१०-१२ इन्द्रः, ३,५,७,९ मरुतः, १३-१५ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः। मरुत्वानिन्द्रः।त्रिष्टुप्। | 15 |
|---|
| सूक्त 166 | १५ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । मरुतः। जगती, १४-१५ त्रिष्टुप्। | 15 |
|---|
| सूक्त 167 | ११ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । १ इन्द्रः, २-११मरुतः। त्रिष्टुप्, (१०पुरस्ताज्ज्योतिः।) | 11 |
|---|
| सूक्त 168 | १० अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । मरुतः। जगती, ८-१० त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 169 | ८ अगस्त्यो मैत्रावरुणः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्, २ चतुष्पदा विराट्। | 8 |
|---|
| सूक्त 170 | (५) १,३,४ इन्द्रः, (४अगस्त्यो वा,) २,५ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । इन्द्रः। १बृहती, २-४ अनुष्टुप्, ५ त्रिष्टुप्। | 5 |
|---|
| सूक्त 171 | ६ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । मरुतः,३-६ मरुत्वानिन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 172 | ३ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । मरुतः। गायत्री। | 3 |
|---|
| सूक्त 173 | १३ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । इन्द्रः। त्रिष्टुप्, ४ विराट् स्थाना, विषमपदा वा। | 13 |
|---|
| सूक्त 174 | १० अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 175 | ६ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । इन्द्रः। १ स्कंधोग्रीवी बृहती, २-५ अनुष्टुप्, ६ त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 176 | ६ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । इन्द्रः। अनुष्टुप्, ६ त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 177 | ५ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 5 |
|---|
| सूक्त 178 | ५ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 5 |
|---|
| सूक्त 179 | (६) १-२ लोपामुद्रा, ३-४ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः, ५-६ अगस्त्यशिष्यो ब्रह्मचारी। रतिः। त्रिष्टुप्, ५ बृहती। | 6 |
|---|
| सूक्त 180 | १-१० अगस्त्यो मैत्रावरुणिः। अश्विनौ। त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 181 | ९ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । अश्विनौ। त्रिष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 182 | ८ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । अश्विनौ। जगती, ६-८ त्रिष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 183 | ६ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । अश्विनौ। त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 184 | ६ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः ।अश्विनौ। त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 185 | ११ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । द्यावापृथिव्यौ। त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 186 | ११ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । विश्वे देवाः। त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 187 | ११ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । अन्नं। १अनुष्टुब्गर्भा उष्णिक्, ३, ५-७, ११ अनुष्टुप्,११ बृहती वा, २, ४, ८-१० गायत्री। | 11 |
|---|
| सूक्त 188 | ११ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । आप्रीसूक्तं-(१ इध्मः समिद्धोऽग्निर्वा, २ तनूनपात् ३ इळः, ४ बर्हिः, ५ देवीर्द्वारः, ६ उषा सानक्ता, ७ दैव्यौ होतारौ प्रचेतसौ, ८ तिस्रो देव्यः सरस्वतीळाभारत्यः, ९ त्वष्टा, १० वनस्पतिः, ११ स्वाहाकृतयः)। गायत्री। | 11 |
|---|
| सूक्त 189 | ८ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । अग्निः। त्रिष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 190 | ८ अगस्त्यो मैत्रावरुणिः । बृहस्पतिः। त्रिष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 191 | ९ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः । अग्निः। गायत्री। १६ अग्स्त्यो मैत्रावरुणिः । (विषघ्नोपनिषद्)। अनुष्टुप्, १०-१२ महा पंक्तिः, १३ महबृहती। | 16 |
|---|