| सूक्त 1 | ७ त्रित आप्त्यः अग्निः। त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 2 | ७ त्रित आप्त्यः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 3 | ७ त्रित आप्त्यः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 4 | ७ त्रित आप्त्यः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 5 | ७ त्रित आप्त्यः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 6 | ७ त्रित आप्त्यः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 7 | ७ त्रित आप्त्यः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 8 | ९ त्रिशिरास्त्वाष्ट्रः। अग्निः,७-९ इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 9 | ९ त्रिशिरास्त्वाष्ट्रः,सिन्धुद्वीप आम्बरीषो वा। आपः। गायत्री,५ वर्धमाना गायत्री, ७ प्रतिष्ठा गायत्री, ८ -९ अनुष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 10 | १४ नवमीवर्ज्यानामयुजां षष्ठ्याश्च वैवस्वती यमी ऋषिका। यमः। षष्ठीवर्ज्यानां युजां नवम्याश्च वैवस्वतो यमः ऋषिः। यमी। त्रिष्टुप्, १३विराट्स्थाना। | 14 |
|---|
| सूक्त 11 | ९ आङ्गिर्हविर्धानः। अग्निः। जगती, ७-९ त्रिष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 12 | ९ आङ्गिर्हविर्धानः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 13 | ५ आङ्गिर्हविर्धानः। विवस्वानादित्यो वा। हविर्धाने। त्रिष्टुप्, ५ जगती। | 5 |
|---|
| सूक्त 14 | १६ वैवस्वतो यमः। यमः,६ अङ्गिरःपित्रथर्वभृगुसोमाः,७-९ लिङ्गोक्तदेवताः पितरो वा,१०-१२ श्वानौ। त्रिष्टुप्,१३,१४,१६, अनुष्टुप्,१५बृहती। | 16 |
|---|
| सूक्त 15 | १४ शङ्खो यामायनः।पितरः। त्रिष्टुप् ,११ जगती। | 14 |
|---|
| सूक्त 16 | १४ दमनो यामायनः। अग्निः। त्रिष्टुप्,११-१४ अनुष्टुप्। | 14 |
|---|
| सूक्त 17 | १४ देवश्रवा यामायनः। १-२ सरण्यूः,३-६ पूषा, ७-९ सरस्वती,१०-१४ आपः, ११-१३ सोमो वा। त्रिष्टुप् ,१३-१४ अनुष्टुप्, १३ पुरस्ताद्बृहती वा। | 14 |
|---|
| सूक्त 18 | १४ संकुसुको यामायनः। १-४ मृत्युः,५ धाता, ६ त्वष्टा,७-१४ पितृमेधः,१४ प्रजापतिर्वा। त्रिष्टुप् , ११ प्रस्तारपंक्तिः, १३ जगती १४ अनुष्टुप्। | 14 |
|---|
| सूक्त 19 | ८ मथितो यामायनः भृगुर्वारुणिर्वा, भार्गवश्च्यवनो वा। आपः गावो वा, १ उत्तरार्धर्चस्य अग्नीषोमौ। अनुष्टुप्, ६ गायत्री । | 8 |
|---|
| सूक्त 20 | १० ऐन्द्रो विमदः प्राजापत्यो वा, वासुक्रो वसुकृद्वा। अग्निः। गायत्री, १ एकपदा विराट् (एष मन्त्र: शान्त्यर्थः) २अनुष्टुप्,९ विराट् १० त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 21 | ८ ऐन्द्रो विमदः, प्राजापत्यो वा, वासुक्रो वसुकृद्वा। अग्निः। आस्तारपंक्तिः। | 8 |
|---|
| सूक्त 22 | १५ ऐन्द्रो विमदः प्राजापत्यो वा, वासुक्रो वसुकृद्वा। इन्द्रः। पुरस्ताद्बृहती ५,७,९ अनुष्टुप्, १५ त्रिष्टुप् । | 15 |
|---|
| सूक्त 23 | ७ ऐन्द्रो विमदः प्राजापत्यो वा, वासुक्रो वसुकृद्वा।इन्द्रः। जगतीः १,७ त्रिष्टुप् ,५ अभिसारिणी। | 7 |
|---|
| सूक्त 24 | ६ ऐन्द्रो विमदः, प्राजापत्यो वा, वासुक्रो वसुकृद्वा। इन्द्रः। ४-६ अश्विनौ। आस्तारपंक्तिः, ४-६ अनुष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 25 | ११ ऐन्द्रो विमदः प्राजापत्यो वा, वासुक्रो वसुकृद्वा। सोमः। आस्तारपंक्तिः। | 11 |
|---|
| सूक्त 26 | ९ ऐन्द्रो विमदः, प्राजापत्यो वा, वासुक्रो वसुकृद्वा।पूषा। अनुष्टुप् ,१,४ उष्णिक्। | 9 |
|---|
| सूक्त 27 | २४ ऐन्द्रो वसुक्र:। इन्द्रः।त्रिष्टुप्। | 24 |
|---|
| सूक्त 28 | (१२) १ इन्द्रस्नुषा वसुक्रपत्नी ऋषिका, २,६,८,१०,१२ इन्द्र ऋषिः, ३,४,५,७,९,११ ऐन्द्रो वसुक्र: ऋषिः। २,६,८,१०,१२ ऐन्द्रो वसुक्रो देवता, १,३,४,५,७,९,११ इन्द्रो देवता। त्रिष्टुप्। | 12 |
|---|
| सूक्त 29 | ८ ऐन्द्रो वसुक्र:। इन्द्रः।त्रिष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 30 | १५ कवष ऐलूषः।आपः, अपां न पात् वा। त्रिष्टुप्। | 15 |
|---|
| सूक्त 31 | ११ कवष ऐलूषः।विश्वे देवाः। त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 32 | ९ कवष ऐलूषः। इन्द्रः। जगती, ६-९ त्रिष्टुप् । | 9 |
|---|
| सूक्त 33 | ९कवष ऐलूषः। १ विश्वेदेवाः, २-३ इन्द्रः, ४-५ कुरुश्रवणस्त्रासदस्यवः, ६-९ उपमश्रवा मैत्रातिथिः। १ त्रिष्टुप् , प्रगाथः = ( २ बृहती, ३ सतोबृहती ),४-९ गायत्री । | 9 |
|---|
| सूक्त 34 | १४ कवष ऐलूषः, अक्षो मौजवान् वा। १,७,९,१२ अक्षाः, १३ ऋषिः, २-६,८, १०,११,१४ अक्ष-कितव-निन्दा। त्रिष्टुप् , ७ जगती । | 14 |
|---|
| सूक्त 35 | १४ लुशो धानाकः। विश्वेदेवाः । जगती,१३-१४ त्रिष्टुप्। | 14 |
|---|
| सूक्त 36 | १४ लुशो धानाकः। विश्वेदेवाः । जगती,१३-१४ त्रिष्टुप्। | 14 |
|---|
| सूक्त 37 | १२ सौर्योऽभितपाः। सूर्यः। जगती, १० त्रिष्टुप्। | 12 |
|---|
| सूक्त 38 | ५ मुष्कवानिन्द्रः। इन्द्रः। जगती। | 5 |
|---|
| सूक्त 39 | १४ काक्षीवती घोषा। अश्विनौ। जगती, १४ त्रिष्टुप्। | 14 |
|---|
| सूक्त 40 | १४ काक्षीवती घोषा। अश्विनौ। जगती। | 14 |
|---|
| सूक्त 41 | ३ सुहस्त्यो घौषेयः। अश्विनौ। जगती। | 3 |
|---|
| सूक्त 42 | ११ कृष्ण आङ्गिरसः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 43 | ११ कृष्ण आङ्गिरसः। इन्द्रः। जगती,१०-११ त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 44 | ११ कृष्ण आङ्गिरसः। इन्द्रः। जगती,१-३,१०-११ त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 45 | १२ वत्सप्रिर्भालन्दनः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 12 |
|---|
| सूक्त 46 | १० वत्सप्रिर्भालन्दनः। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 47 | ८ सप्तगुरांगिरसः। वैकुण्ठ इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 48 | वैकुण्ठ इन्द्रः। इन्द्रः। जगतीः, ७, १०-११ त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 49 | ११ वैकुण्ठ इन्द्रः। इन्द्रः। जगतीः, २-११ त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 50 | ७ वैकुण्ठ इन्द्रः। इन्द्रः। जगतीः, ३,४ अभिसारिणी, ५ त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 51 | (९) १,३,५,७,९देवाः, २,४,६,८, सौचीकोऽग्निः। २,,४,६,८ देवाः १,३,५,७,९, अग्निः।त्रिष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 52 | ६ सौचीकोऽग्निः। विश्वेदेवाः। त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 53 | ११ देवाः,४-५ सौचीकोऽग्निः। अग्निः,४-५ देवाः। १-५ ,८त्रिष्टुप् , ६-७,९-११ जगती। | 11 |
|---|
| सूक्त 54 | ६ बृहदुक्थो वामदेव्यः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 55 | ८ बृहदुक्थो वामदेव्यः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 56 | ७ बृहदुक्थो वामदेव्यः। विश्वेदेवाः। त्रिष्टुप्। ४-६ जगती। | 7 |
|---|
| सूक्त 57 | ६ बन्धु: श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुर्गौपायनाः।विश्वेदेवाः। गायत्री। | 6 |
|---|
| सूक्त 58 | १२ बन्धु: श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुर्गौपायनाः।मन आवर्तनम्। अनुष्टुप्। | 12 |
|---|
| सूक्त 59 | १० बन्धु श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुर्गौपायनाः।१-३ निर्ऋतिः,४ निर्ऋतिः सोमश्च, ५-६असुनीतिः, ७ पृथिवी-द्वयन्तरिक्ष-सोम-पूष-पथ्या-स्वस्तयः,८-१० द्यावापृथिवी, १० (पूर्वार्धस्य) इन्द्र- द्यावापृथिव्यः। त्रिष्टुप् , ८ पंक्तिः,९ महापंक्तिः, १० पंक्त्युत्तरा। | 10 |
|---|
| सूक्त 60 | १२ बन्धु: श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुर्गौपायनाः,६ अगस्त्यस्वसा एषां माता ऋषिका। १-४,६ असमातिः, ५ इन्द्रः,७-११ जीवः,१२ हस्तः।अनुष्टुप्,१-५ गायत्री, ८-९ पंक्तिः। | 12 |
|---|
| सूक्त 61 | २७ नाभानेदिष्ठो मानवः। विश्वे देवाः। त्रिष्टुप्। | 27 |
|---|
| सूक्त 62 | ११ नाभानेदिष्ठो मानवः। विश्वे देवाः, १-६ अंगिरसो वा, ८-११ सावर्णेदानम्। जगती, ५,८,९ अनुष्टुप् प्रगाथ: =(६ बृहती, ७ सतोबृहती ) १० गायत्री, ११ त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 63 | १७ गयः प्लातः। विश्वे देवाः, १५-१६ पथ्या स्वस्तिः। जगती, १५ त्रिष्टुब्वा; १६-१७ त्रिष्टुप्। | 17 |
|---|
| सूक्त 64 | १७ गयः प्लातः। विश्वे देवाः।जगती, १२,१६,१७ त्रिष्टुप्। | 17 |
|---|
| सूक्त 65 | १५ वसुकर्णो वासुक्र:। विश्वेदेवाः। जगती, १५ त्रिष्टुप्। | 15 |
|---|
| सूक्त 66 | १५ वसुकर्णो वासुक्र:। विश्वेदेवाः। जगती, १५ त्रिष्टुप्। | 15 |
|---|
| सूक्त 67 | १२ अयास्य आंगिरसः। बृहस्पति:। त्रिष्टुप्। | 12 |
|---|
| सूक्त 68 | १२ अयास्य आंगिरसः। बृहस्पति:। त्रिष्टुप्। | 12 |
|---|
| सूक्त 69 | १२ सुमित्रो वाध्र्यश्वः। अग्निः। त्रिष्टुप्, १-२ जगती। | 12 |
|---|
| सूक्त 70 | ११सुमित्रो वाध्र्यश्वः। आप्रीसूक्तं = (१ इध्मः समिद्धोऽग्निर्वा, २ नराशंसः, ३ इळ:, ४ बर्हिः, ५ देवीर्द्वारः, ६ उषासानक्ता, ७ दैव्यौ होतारौ प्रचेतसौ, ८ त्रिस्रो देव्यः सरस्वतीळाभारत्यः, ९ त्वष्टा, १० वनस्पतिः, ११ स्वाहाकृतयः) । त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 71 | ११ बृहस्पतिरांगिरसः। ज्ञानम्। त्रिष्टुप् ,९ जगती। | 11 |
|---|
| सूक्त 72 | ९ लौक्यो बृहस्पतिः, बृहस्पतिरांगिरसो वा, दाक्षायणी अदितिर्वा। देवाः। अनुष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 73 | ११ गौरिवीतिःशाक्त्यः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 74 | ६ गौरिवीतिःशाक्त्यः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 75 | ९ सिन्धुक्षित् प्रैयमेधः। नद्यः। जगती। | 9 |
|---|
| सूक्त 76 | ८ सर्प ऐरावतो जरत्कर्णः। ग्रावाणः। जगती। | 8 |
|---|
| सूक्त 77 | ८ स्यूमरश्मिर्भार्गवः। मरुतः। त्रिष्टुप् , ५ जगती। | 8 |
|---|
| सूक्त 78 | ८ स्यूमरश्मिर्भार्गवः। मरुतः। त्रिष्टुप् , २,५-७ जगती। | 8 |
|---|
| सूक्त 79 | ७ सौचीकोऽग्निर्वैश्वानरो वा, सप्तिर्वाजंभरो वा। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 80 | ७ सौचीकोऽग्निर्वैश्वानरो वा, सप्तिर्वाजंभरो वा। अग्निः। त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 81 | ७ विश्वकर्मा भौवनः। विश्वकर्मा । त्रिष्टुप् , २ विराड्रूपा। | 7 |
|---|
| सूक्त 82 | ७ विश्वकर्मा भौवनः। विश्वकर्मा। त्रिष्टुप् । | 7 |
|---|
| सूक्त 83 | ७ मन्युस्तापसः। मन्युः। त्रिष्टुप् , १ जगती। | 7 |
|---|
| सूक्त 84 | ७ मन्युस्तापसः। मन्युः। जगती,१-३ त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 85 | ४७ सावित्री सूर्या ऋषिका। १-५ सोमः, ६-१६ सूर्याविवाहः, १७ देवाः, १८ सोमार्कौ, १९ चन्द्रमाः, २०-२८ नृणां विवाहमन्त्रा आशी:प्रायाः, २९-३० वधूवासः संस्पर्शनिन्दा, ३१ दम्पत्योर्यक्ष्मनाशनं, ३२-४७ सूर्या सावित्री। अनुष्टुप् , १४,१९-२१,२३-२४,२६,३६-३७,४४ त्रिष्टुप्, १८,२७,४३ जगती, ३४ उरोबृहती। | 47 |
|---|
| सूक्त 86 | (२३) इन्द्रः, ७,१३,२३ ऐन्द्रो वृषाकपिः, २-६,९-१०,१५-१८ इन्द्राणी। इन्द्रः। पंक्तिः। | 23 |
|---|
| सूक्त 87 | २५ पायुर्भारद्वाजः।रक्षोहाग्निः।त्रिष्टुप् , २२-२५ अनुष्टुप्। | 25 |
|---|
| सूक्त 88 | १९ आंगिरसो मूर्धन्वान् , वामदेव्यो वा। सूर्य-वैश्वानरोऽग्निः। त्रिष्टुप्। | 19 |
|---|
| सूक्त 89 | १८ रेणुर्वैश्वामित्रः। इन्द्रः, ५ इन्द्रासोमौ। त्रिष्टुप्। | 18 |
|---|
| सूक्त 90 | १६ नारायणः। पुरुषः। अनुष्टुप् , १६ त्रिष्टुप्। | 16 |
|---|
| सूक्त 91 | १५ अरुणो वैतहव्यः। अग्निः। जगती, १५ त्रिष्टुप्। | 15 |
|---|
| सूक्त 92 | १५ शार्यातो मानवः। विश्वेदेवाः। जगती। | 15 |
|---|
| सूक्त 93 | १५ तान्वः पार्थ्यः। विश्वेदेवाः। प्रस्तारपंक्तिः २,३,१३ अनुष्टुप् , ९ अक्षरैः पंक्तिः, ११ न्यङ्कुसारिणी, १५ पुरस्ताद्बृहती । | 15 |
|---|
| सूक्त 94 | १४ अर्बुदः काद्रवेयः सर्पः। ग्रावाणः। जगती, ५, ७, १४ त्रिष्टुप्। | 14 |
|---|
| सूक्त 95 | १८ ऐलः पुरूरवाः। उर्वशी देवता। २,४-५,७, ११, १३, १५-१६,१८, उर्वशी ऋषिका। पुरूरवा देवता। त्रिष्टुप्। | 18 |
|---|
| सूक्त 96 | १३ बरुरांगिरसः, सर्वहरिर्वा ऐन्द्रः। हरिः। जगती, १२-१३ त्रिष्टुप्। | 13 |
|---|
| सूक्त 97 | २३ आथर्वणो भिषग्। ओषधयः। अनुष्टुप्। | 23 |
|---|
| सूक्त 98 | १२ आर्ष्टिषेणो देवापिः (वृष्टिकामः) । देवाः। त्रिष्टुप्। | 12 |
|---|
| सूक्त 99 | १२ वम्रो वैखानसः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 12 |
|---|
| सूक्त 100 | १२ दुवस्युर्वान्दनः। विश्वेदेवाः। जगती, १२ त्रिष्टुप्। | 12 |
|---|
| सूक्त 101 | १२ बुधः सौम्यः। विश्वे देवा, ऋत्विजो वा । त्रिष्टुप् ४, ६ गायत्री, ५ बृहती, ९,१२ जगती। | 12 |
|---|
| सूक्त 102 | १२ मुद्गलो भार्म्यश्वः। द्रुघणः, इन्द्रो वा। त्रिष्टुप्, १,३, १२ बृहती। | 12 |
|---|
| सूक्त 103 | १३ ऐन्द्रोऽप्रतिरथः। इन्द्रः, ४ बृहस्पति:, १२ अप्वा देवी, १३ मरुतो वा। त्रिष्टुप् , १३ अनुष्टुप्। | 13 |
|---|
| सूक्त 104 | ११ अष्टको वैश्वामित्रः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 105 | ११ कौत्सो दुर्मित्रः सुमित्रो वा। इन्द्रः। उष्णिक्, १ गायत्री वा २,७ पिपीलिकमध्या, ११ त्रिष्टुप् । | 11 |
|---|
| सूक्त 106 | ११ भूतांशः काश्यपः। अश्विनौ। त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 107 | ११ दिव्य आंगिरसः, दक्षिणा वा प्राजापत्या। दक्षिना, दक्षिणादातारो वा। त्रिष्टुप् , ४ जगती। | 11 |
|---|
| सूक्त 108 | ११ पणयोऽसुराः। सरमा देवता। २,४,६,८,१०-११ सरमा देवशुनी ऋषिका। पणयो देवता। त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 109 | ७ जुहूर्ब्रह्मजाया, ब्राह्मः ऊर्ध्वनाभा वा।विश्वेदेवाः। त्रिष्टुप् , ६-७ अनुष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 110 | ११ जमदग्निर्भार्गवः, जामदग्न्यो रामो वा। आप्रीसूक्तं = (१ इध्मः समिद्धोऽग्निर्वा, २ तनूनपात् , ३ इळ:, ४ बर्हिः, ५ देवीर्द्वारः, ६ उषासानक्ता, ७ दैव्यौ होतारौ प्रचेतसौ, ८ त्रिस्रो देव्यः सरस्वतीळाभारत्यः, ९ त्वष्टा, १० वनस्पतिः, ११ स्वाहाकृतयः) । त्रिष्टुप्। | 11 |
|---|
| सूक्त 111 | १० वैरूपोऽष्टादंष्ट्रः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 112 | १० वैरूपो नभः प्रभेदनः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 113 | १० वैरूपः शतप्रभेदनः। इन्द्रः। जगती, १० त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 114 | १० वैरूपः सध्रिः, तापसो धर्मो वा। विश्वे देवाः।त्रिष्टुप्, ४ जगती। | 10 |
|---|
| सूक्त 115 | ९ वार्ष्टिहव्य उपस्तुतः। अग्निः।जगती, ८ त्रिष्टुप्, ९ शक्करी। | 9 |
|---|
| सूक्त 116 | ९ स्थौरोऽग्नियुतः स्थौरोऽग्नियूपो वा।इन्द्रः त्रिष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 117 | ९ भिक्षुरांगिरसः। धनान्नदानं। त्रिष्टुप् , १-२ जगती। | 9 |
|---|
| सूक्त 118 | ९ उरुक्षय आमहीयवः। रक्षोहाऽग्निः। गायत्री। | 9 |
|---|
| सूक्त 119 | १३ ऐन्द्रो लब:।आत्मा (इन्द्रः) । गायत्री। | 13 |
|---|
| सूक्त 120 | ९ आथर्वणो बृहहिवः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 9 |
|---|
| सूक्त 121 | १० हिरण्यगर्भः प्राजापत्य:। कः(प्रजापतिः)। त्रिष्टुप्। | 10 |
|---|
| सूक्त 122 | ८ चित्रमहा वासिष्ठः । अग्निः। जगतीः १,५ त्रिष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 123 | ८ वेनो भार्गवः। वेनः। त्रिष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 124 | ९ अग्नि:, १,५-९ अग्नि-वरुण-सोमाः। १अग्निः,२-४ अग्नेरात्माः, ५,७-८ वरुण:, ६ सोमः, ९ इन्द्रः। त्रिष्टुप् ७ जगती। | 9 |
|---|
| सूक्त 125 | ८ वागाम्भृणी। आत्मा। त्रिष्टुप् , २ जगती। | 8 |
|---|
| सूक्त 126 | ८ शैलूषिः कुल्मलबर्हिषो, वामदेव्योऽहोमुग्वा। विश्वेदेवाः। उपरिष्टाद्बृहती,८ त्रिष्टुप्। | 8 |
|---|
| सूक्त 127 | ८ कुशिकः सौभरः, रात्रिर्वा भारद्वाजी। रात्रिः। गायत्री। | 8 |
|---|
| सूक्त 128 | ९ विहव्य आंगिरसः। विश्वेदेवाः। त्रिष्टुप् , ९ जगती। | 9 |
|---|
| सूक्त 129 | ७ प्रजापतिः परमेष्ठी। भाववृत्तम्। त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 130 | ७ यज्ञः प्राजापत्यः। भाववृत्तम्। त्रिष्टुप् , १ जगती। | 7 |
|---|
| सूक्त 131 | ७ सुकीर्तिः काक्षीवत्। इन्द्रः,४-५ अश्विनौ। त्रिष्टुप् , ४ अनुष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 132 | ७ शकपूतो नार्मेधः। मित्रावरुणौ, १ द्युभूम्यश्विनः। विराड्रूपा, १ न्यङ्कुसारिणी, २,६ प्रस्तारपंक्तिः, ७ महासतोबृहती। | 7 |
|---|
| सूक्त 133 | ७ सुदाः पैजवनः। इन्द्रः।शक्करी, ४-६ महापंक्तिः, ७ त्रिष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 134 | ७,१-६ (पूर्वार्धस्य) मान्धाता यौवनाश्वः,६ (उत्तरार्धस्य) ७ गोधा ऋषिका। इन्द्रः। महापंक्तिः, ७ पंक्तिः। | 7 |
|---|
| सूक्त 135 | ७ कुमारो यामायनः। यमः। अनुष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 136 | १ जूतिः, २ वातजूतिः, ३ विप्रजूतिः, ४ वृषाणकः, ५ करिक्रतः, ६ एतशः ७ ऋष्यश्रृंगः (एते वातरशना मुनयः)। केशिनः = अग्नि-सूर्य-वायवः। अनुष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 137 | ७,१ भरद्वाज:, २ कश्यपः, ३ गौतमः, ४ अत्रिः, ५ विश्वामित्रः, ६ जमदग्निः, ७ वसिष्ठः। विश्वेदेवाः। अनुष्टुप्। | 7 |
|---|
| सूक्त 138 | ६ अंग औरवः।इन्द्रः। जगती। | 6 |
|---|
| सूक्त 139 | ६ देवगन्धर्वो विश्वावसुः। सविता, ४-६ आत्मा। त्रिष्टुप्। | 6 |
|---|
| सूक्त 140 | ६ अग्निः पावकः। अग्निः। सतोबृहती, १-२ विष्टारपंक्तिः, ६ उपरिष्टाज्ज्योतिः। | 6 |
|---|
| सूक्त 141 | ६ अग्निस्तापसः। विश्वेदेवाः। अनुष्टुप्। | 6 |
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| सूक्त 142 | ८ शार्गां: १-२ जरिता, ३-४ द्रोणः, ५-६ सारिसृक्व:, ७-८ स्तम्बमित्रः। अग्निः। त्रिष्टुप् , १-२ जगती, ७-८ अनुष्टुप्। | 8 |
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| सूक्त 143 | ६ अत्रिः सांख्यः। अश्विनौ। अनुष्टुप्। | 6 |
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| सूक्त 144 | ६ तार्क्ष्र्यः सुपर्णः, यामायन ऊर्ध्वकृशनो वा। इन्द्रः। गायत्री, २ बृहती, ५ सतोबृहती, ६ विष्टारपंक्तिः। | 6 |
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| सूक्त 145 | ६ इन्द्राणी।सपत्नीबाधनम् (उपनिषत्) । अनुष्टुप् , ६ पंक्तिः। | 6 |
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| सूक्त 146 | ६ ऐरम्मदो देवमुनि:। अरण्यानी।अनुष्टुप्। | 6 |
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| सूक्त 147 | ५ सुवेदाः शैरीषिः। इन्द्रः। जगती, ५ त्रिष्टुप्। | 5 |
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| सूक्त 148 | ५ पृथुर्वैन्यः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 5 |
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| सूक्त 149 | ५ अर्चन् हैरण्यस्तूपः। सविता। त्रिष्टुप्। | 5 |
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| सूक्त 150 | ५ मृळीको वासिष्ठः। अग्निः। बृहती, ४-५ उपरिष्टाज्ज्योतिः, ४ जगती वा। | 5 |
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| सूक्त 151 | श्रद्धा सूक्त ५ श्रद्धा कामायनी।श्रधा । अनुष्टुप्। | 5 |
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| सूक्त 152 | ५ शासो भारद्वाजः। इन्द्रः। अनुष्टुप्। | 5 |
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| सूक्त 153 | ५ देवजामय इन्द्रमातरः। इन्द्रः। गायत्री। | 5 |
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| सूक्त 154 | ५ यमी वैवस्वती। भाववृत्तम्। अनुष्टुप्। | 5 |
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| सूक्त 155 | ५ शिरिम्बिठो भारद्वाजः। अलक्ष्मीघ्नम् , २-३ ब्रह्मणस्पतिः, ५ विश्वेदेवाः। अनुष्टुप्। | 5 |
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| सूक्त 156 | ५ केतुराग्नेयः। अग्निः। गायत्री। | 5 |
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| सूक्त 157 | ५ भुवन आप्त्यः, साधनो वा भौवनः।विश्वेदेवाः। द्विपदा त्रिष्टुप्। | 5 |
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| सूक्त 158 | ५ चक्षुः सौर्यः। सूर्यः। गायत्री, २ स्वराट्। | 5 |
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| सूक्त 159 | ६ पौलोमी शची। शची (आत्मानं तुष्टाव)। अनुष्टुप्। | 6 |
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| सूक्त 160 | ५ पूरणो वैश्वामित्रः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 5 |
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| सूक्त 161 | ५ प्राजापत्यो यक्ष्मनाशनः।इन्द्राग्नी, राजयक्ष्मघ्नं वा। त्रिष्टुप् , ५ अनुष्टुप्। | 5 |
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| सूक्त 162 | ६ ब्राह्मो रक्षोहा। रक्षोहा। अनुष्टुप्। | 6 |
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| सूक्त 163 | ६ विवृहा काश्यपः। यक्ष्मनाशनम्। अनुष्टुप्। | 6 |
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| सूक्त 164 | ५ प्रचेता आंगिरसः। दु:स्वप्ननाशनम्। अनुष्टुप् , ३ त्रिष्टुप्, ५ पंक्तिः। | 5 |
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| सूक्त 165 | ५ नैऋर्तः कपोतः।विश्वेदेवाः। त्रिष्टुप्। | 5 |
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| सूक्त 166 | ५ ऋषभो वैराजः, ऋषभः शाक्वरो वा। सपत्न्घ्नम्। अनुष्टुप् , ५ महापंक्तिः। | 5 |
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| सूक्त 167 | ४ विश्वामित्र-जमदग्नी। इन्द्रः, ३ सोम-वरुण-बृहस्पति-अनुमति-मघवत्-धातृ-विधातारः। जगती । | 4 |
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| सूक्त 168 | ४ अनिलो वातायनः। वायुः। त्रिष्टुप्। | 4 |
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| सूक्त 169 | ४ शबरः काक्षीवतः।गावः। त्रिष्टुप्। | 4 |
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| सूक्त 170 | ४ विभ्राट् सौर्यः। सूर्यः। जगती, ४ आस्तारपंक्तिः। | 4 |
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| सूक्त 171 | ४ इटो भार्गवः। इन्द्रः। गायत्री। | 4 |
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| सूक्त 172 | ४ संवर्त आंगिरसः। उषाः। द्विपदा विराट्। | 2 |
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| सूक्त 173 | ६ ध्रुव आंगिरसः। राजा। अनुष्टुप्। | 6 |
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| सूक्त 174 | ५ अभीवर्त आंगिरसः। राजा। अनुष्टुप्। | 5 |
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| सूक्त 175 | ४ ऊर्ध्वग्रावा सर्प आर्बुदिः। ग्रावाणः। गायत्री। | 4 |
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| सूक्त 176 | ४ सूनुरार्भवः। १ ऋभवः, २-४ अग्निः। अनुष्टुप् , २ गायत्री। | 4 |
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| सूक्त 177 | ३ पतंगः प्राजापत्यः। मायाभेदः। त्रिष्टुप्। १ जगती। | 3 |
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| सूक्त 178 | ३ अरिष्टनेमिस्तार्क्ष्यः। तार्क्ष्यः। त्रिष्टुप्। | 3 |
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| सूक्त 179 | ३ क्रमेण- शिविरौशीनरः, काशिराजः प्रतर्दनः, रौहिदश्वो वसुमनाः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्,१ अनुष्टुप्। | 3 |
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| सूक्त 180 | ३ जय ऐन्द्रः। इन्द्रः। त्रिष्टुप्। | 3 |
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| सूक्त 181 | ३ क्रमेण- प्रथो वासिष्ठः, सप्रथो भारद्वाजः, धर्मः सौर्यः। विश्वेदेवाः। त्रिष्टुप्। | 3 |
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| सूक्त 182 | ३ तपुर्मूर्धा बार्हस्पत्यः। बृहस्पतिः। त्रिष्टुप्। | 3 |
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| सूक्त 183 | ३ प्रजावान् प्राजापत्यः। १ यजमानः, २ यजमानपत्नी, ३ होत्राशिवः। त्रिष्टुप्। | 3 |
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| सूक्त 184 | ३ त्वष्टा गर्भकर्ता, विष्णुर्वाप्राजापत्यः। १ विष्णु-त्वष्ट्ट-प्रजापति-धातारः, २ सिनीवाली- सरस्वत्यश्विनः, ३ अश्विनौ। अनुष्टुप्। | 3 |
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| सूक्त 185 | ३ सत्यधृतिर्वारुणिः। आदित्यः (स्वस्त्ययनम्)। गायत्री। | 3 |
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| सूक्त 186 | ३ वातायन उलः। वायुः। गायत्री। | 3 |
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| सूक्त 187 | ५ आग्नेयो वत्सः। अग्निः। गायत्री। | 5 |
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| सूक्त 188 | ३ आग्नेयः श्येनः। जातवेदा अग्निः। गायत्री। | 3 |
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| सूक्त 189 | ३ सार्पराज्ञी। आत्मा,सूर्यो वा। गायत्री। | 3 |
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| सूक्त 190 | ३ माधुच्छन्दसोऽघमर्षणः। भाववृत्तम्। अनुष्टुप्। | 3 |
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| सूक्त 191 | ४ संवनन आङ्गिरसः। १ अग्निः,२-४ संज्ञानम्। अनुष्टुप् , ३ त्रिष्टुप्। | 4 |
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