| सूक्त 1 | (३४) १-२ प्रगाथो ( घौर : ) काण्व: ; ३-२९ मेघातिथि – मेध्यातिथी काण्वौ, ३०-३३ प्लायोगिरासङ्ग:, ३४ आङ्गिरसी शश्वती ऋषिका । इन्द्र:,३० -३४ आसङ्ग:। १-४ प्रगाथ:= ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ), ५-३२ बृहती, ३३-३४ त्रिष्टुप् । | 34 |
|---|
| सूक्त 2 | (४२) १-४० मेघातिथि: –काण्व: , आङ्गिरस: प्रियमेधश्च, ४१-४२ मेघातिथि: –काण्व: । इन्द्र:, ४१ -४२ विभिन्दु:।गायत्री,२८ अनुष्टुप् । | 42 |
|---|
| सूक्त 3 | मेध्यातिथि: काण्व: । इन्द्र:, २१ -२४ कौरयाण: पाकस्थामा । प्रगाथ : = ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ), २१ अनुष्टुप् , २२ -२३ गायत्री, २४ बृहती । | 24 |
|---|
| सूक्त 4 | २१ देवातिथि: काण्व: ।इन्द्र:, १५ -१८ पूषा वा , १९ -२१ कुरुङ्ग: । प्रगाथ: = ( विषमा बृहती , समा सतोबृहती ), २१ पुर उष्णिक् । | 21 |
|---|
| सूक्त 5 | ३९ ब्रह्मातिथि: काण्व: ।अश्विनौ, ३७ ( उत्तरार्धस्य ) – ३९ चैद्य: कशु: । गायत्री, ३७ -३८ बृहती , ३९ अनुष्टुप् । | 39 |
|---|
| सूक्त 6 | ४८ वत्स: काण्व । इन्द्र:, ४६ -४८ तिरिन्दिर: पार्शव्य: । गायत्री । | 48 |
|---|
| सूक्त 7 | ३६ पुनर्वत्स: काण्व: । मरुत: । गायत्री । | 36 |
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| सूक्त 8 | २३ सध्वंस: काण्व: । अश्विनौ ।अनुष्टुप् । | 23 |
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| सूक्त 9 | २१ शशकर्ण: काण्व: ।अश्विनौ । अनुष्टुप् ; १,४,६,१४-१५ बृहती ; २,३,२०,२१ गायत्री ; ५ ककुप् ; १० त्रिष्टुप् , विराट्, १२ जगती । | 21 |
|---|
| सूक्त 10 | ६ प्रगाथो ( घौर: ) काण्व: । अश्विनौ ।१ बृहती , २ मध्येज्योति:, ३ अनुष्टुप् ( पिंगलमतेन – शंकुमती ), ४ आस्तारपंक्ति:, ५-६ प्रगाथ: = ( ५ बृहती ,६ सतोबृहती ) । | 6 |
|---|
| सूक्त 11 | १० वत्स: काण्व: । अग्नि: ।गायत्री , १ प्रतिष्ठा, २ वर्धमाना , १० त्रिष्टुप् । | 10 |
|---|
| सूक्त 12 | ३३ पर्वत: काण्व: । इन्द्र: ।उष्णिक् , ३३ शंकुमती ( पिंगलमतेन ) । | 33 |
|---|
| सूक्त 13 | ३३ नारद: काण्व: । इन्द्र: । उष्णिक् । | 33 |
|---|
| सूक्त 14 | १५ गोषूक्त्यश्वसूक्तिनौ काण्वायनौ । इन्द्र: । गायत्री । | 15 |
|---|
| सूक्त 15 | १३ गोषूक्त्यश्वसूक्तिनौ काण्वायनौ । इन्द्र: । उष्णिक् । | 13 |
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| सूक्त 16 | १२ इरिम्बिष्ठिः काण्व: । इन्द्र: । गायत्री । | 12 |
|---|
| सूक्त 17 | १५ इरिम्बिष्ठिः काण्व: ।इन्द्र: ; १४ वास्तोष्पतिर्वा । गायत्री , प्रगाथ:= (१४ बृहती , १५ सतोबृहती ) । | 15 |
|---|
| सूक्त 18 | २२ इरिम्बिष्ठिः काण्व: ।आदित्या: ;४,६,७, अदिति:; ८ अश्विनौ; ९ अग्निसूर्यानिला : । उष्णिक् । | 22 |
|---|
| सूक्त 19 | ३७ सोभरि: काण्व:।अग्नि :,३४-३५ आदित्या:; ३६-३७ त्रसदस्यु: पौरुकुत्स्य:। १-२६ प्रगाथ:= ( विषमा ककुप् , समा सतोबृहती ) , २७ द्विपदा विराट् , २८-३३ प्रगाथ: = ( समा ककुप् , विषमा सतोबृहती ), ३४ उष्णिक्,३५ सतोबृहती , ३६ ककुप् ; ३७ पंक्ति : । | 37 |
|---|
| सूक्त 20 | २६ सोभरि: काण्व:। मरुत: । प्रगाथ:= ( विषमा ककुप् , समा सतोबृहती ), १४ सतो विराट् । | 26 |
|---|
| सूक्त 21 | १८ सोभरि: काण्व:। इन्द्र: १७ -१८ चित्र: । प्रगाथ: = (विषमा ककुप् , समा सतोबृहती ) । | 18 |
|---|
| सूक्त 22 | १८ सोभरि : काण्व:।अश्विनौ ।१-६ प्रगाथ: = ( विषमा बृहती , समा सतोबृहती ), ७ बृहती , ८ अनुष्टुप् , ११ ककुप् , १२ मध्येज्योति:, प्रगाथ:=(९ ,१३,१५,१७ ककुप् ; १०, १४ ,१६ ,१८ सतोबृहती ) । | 18 |
|---|
| सूक्त 23 | ३० विश्वमना वैयश्व: । अग्नि : ।उष्णिक् । | 30 |
|---|
| सूक्त 24 | ३० विश्वमना वैयश्व: । इन्द्र:, २८-३० वरु: सौषाम्णि: । उष्णिक्, ३० अनुष्टुप्। | 30 |
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| सूक्त 25 | २४ विश्वमना वैयश्व: । मित्रावरुणौ, १०-१२ विश्वे देवा : । उष्णिक् ,२३ उष्णिग्गर्भा । | 24 |
|---|
| सूक्त 26 | २५ विश्वमना वैयश्व:,व्यश्वो वांगिरस: ।अश्विनौ, २०-२५ वायु: ।उष्णिक्; १६-१९,२१,२५ गायत्री; २० अनुष्टुप् । | 25 |
|---|
| सूक्त 27 | २२ मनुर्वैवस्वत: ।विश्वे देवा: ।प्रगाथ: = ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 22 |
|---|
| सूक्त 28 | ५ मनुर्वैवस्वत: । विश्वे देवा: । गायत्री , ४ पुरउष्णिक् । | 5 |
|---|
| सूक्त 29 | १० मनुर्वैवस्वत:, कश्यपो वा मारीच:। विश्वे देवा: । द्विपदा विराट्। | 5 |
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| सूक्त 30 | ४ मनुर्वैवस्वत: । विश्वे देवा: । १ गायत्री , २ पुरउष्णिक् , ३ बृहती , ४ अनुष्टुप् । | 4 |
|---|
| सूक्त 31 | १८ मनुर्वैवस्वत: ।१-४ यज्ञ: यजमानश्च , ५-९ दंपति , १०-१८ दम्पत्याशिष: । गायत्री ; ९,१४ अनुष्टुप् , १० पादनिचृत , १५-१८ पंक्ति: । | 18 |
|---|
| सूक्त 32 | ३० मेधातिथि : काण्व:। इन्द्र: । गायत्री । | 30 |
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| सूक्त 33 | १९ मेध्यातिथि : काण्व:। इन्द्र: । बृहती , १६-१८ गायत्री , १९ अनुष्टुप् । | 19 |
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| सूक्त 34 | (१८) १ १५ नीपातिथि: काण्व:, १६ -१८ सहस्रं वसुरोचिषोऽङ्गिरस: । इन्द्र: । अनुष्टुप् , १६-१८ गायत्री । | 18 |
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| सूक्त 35 | २४ श्यावाश्व आत्रेय: । अश्विनौ । उपरिष्टाज्ज्योति: ( त्रिष्टुप् ), २२, २४ पंक्ति:, २३ महाबृहती । | 24 |
|---|
| सूक्त 36 | ७ श्यावाश्व आत्रेय: । इन्द्र: । शक्वरी, ७ महापंक्ति: । | 7 |
|---|
| सूक्त 37 | ७ श्यावाश्व आत्रेय: । इन्द्र: । महापंक्ति:, १ अतिजगती । | 7 |
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| सूक्त 38 | १० श्यावाश्व आत्रेय: । इन्द्राग्नी । गायत्री । | 10 |
|---|
| सूक्त 39 | १० नाभाक: काण्व:। अग्नि: । महापंक्ति: । | 10 |
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| सूक्त 40 | १२ नाभाक: काण्व:। इन्द्राग्नी । महापंक्ति:, २ शक्वरी ,१२ त्रिष्टुप् । | 12 |
|---|
| सूक्त 41 | १० नाभाक: काण्व:। वरुण : । महापंक्ति: । | 10 |
|---|
| सूक्त 42 | ६ नाभाक: काण्व:, अर्चनाना आत्रेयो वा ।१-३ वरुण:, ४-६ अश्विनौ ।१-३ त्रिष्टुप् , ४-६ अनुष्टुप् । | 6 |
|---|
| सूक्त 43 | ३३ विरूप आङ्गिरस: । अग्नि: । गायत्री । | 33 |
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| सूक्त 44 | ३० विरूप आङ्गिरस: । अग्नि: । गायत्री । | 30 |
|---|
| सूक्त 45 | ४२ त्रिशोक: काण्व:। इन्द्र:; १ अग्नीन्द्रौ ।गायत्री । | 42 |
|---|
| सूक्त 46 | ३३ वशोऽश्व्य: । इन्द्र:; २१ -२४ कानीत: पृथुश्रवा:; २५-२८ , ३२ वायु: । गायत्री , १ पादनिचृत् ; ५ ककुप् ,७ बृहती , ८ अनुष्टुप् , ९ सतोबृहती, ११-१२ विपरीतोत्तर: प्रगाथ: = ( बृहती, विपरीता ), १३ द्विपदा जगती , १४ बृहती पिपीलिकमध्या, १५ ककुम्न्यंकुशिरा, १६ विराट्, १७ जगती, १८ उपरिष्टाद् बृहती ,१९ बृहती , २० विषमपदा बृहती ; २१ ,२४ पंक्ति:; २२ संस्तारपंक्ति: , २४ -२८ ; प्रगाथ: = ( बृहती , सतोबृहती ), ३० द्विपदा विराट् , ३१ उष्णिक् , ३२ पंक्ति: । | 33 |
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| सूक्त 47 | १८ त्रित आप्त्य: । आदित्या: , १४ -१८ आदित्योषस: ( दु:स्वप्नघ्नं ) । महापंक्ति: । | 18 |
|---|
| सूक्त 48 | १५ प्रगाथो घौर: काण्व:। सोम: । त्रिष्टुप् , ५ जगती । | 15 |
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| सूक्त 49 | १० प्रस्कण्व: काण्व:। इन्द्र: । प्रगाथ:= ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 10 |
|---|
| सूक्त 50 | १० पुष्टिगु: काण्व:। इन्द्र: । प्रगाथ:= ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 10 |
|---|
| सूक्त 51 | १० श्रुष्टिगु: काण्व:। इन्द्र: । प्रगाथ:= ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 10 |
|---|
| सूक्त 52 | १० आयु: काण्व:। इन्द्र: । प्रगाथ:= ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 10 |
|---|
| सूक्त 53 | ८ मध्य: काण्व:। इन्द्र: । प्रगाथ:= ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 8 |
|---|
| सूक्त 54 | ८ मातरिश्वा काण्व:। इन्द्र:, ३-४ विश्वे देवा : । प्रगाथ:= ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 8 |
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| सूक्त 55 | ५ कृश: काण्व:। इन्द्र:, प्रस्कण्वश्च । गायत्री , ३, ५ अनुष्टुप् । | 5 |
|---|
| सूक्त 56 | ५ पृषध्र: काण्व:। इन्द्र:, प्रस्कण्वश्च ५ अग्निसूर्यौ । गायत्री , ५ पंक्ति:। | 5 |
|---|
| सूक्त 57 | ४ मेध्य: काण्व:। अश्विनौ । त्रिष्टुप् । | 4 |
|---|
| सूक्त 58 | ३ मेध्य: काण्व:। विश्वे देवा:, १ ऋत्विजो वा । त्रिष्टुप् । | 3 |
|---|
| सूक्त 59 | ७ सुपर्ण: काण्व:। इन्द्रावरुणौ ।जगती । | 7 |
|---|
| सूक्त 60 | २० भर्ग: प्रागाथ: । अग्नि: । प्रगाथ:= ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 20 |
|---|
| सूक्त 61 | १८ भर्ग: प्रागाथ: । इन्द्र: । प्रगाथ:= ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती, ) १७ शंकुमती । | 18 |
|---|
| सूक्त 62 | १२ प्रगाथो घौर: काण्व:। इन्द्र: । पंक्ति: , ७-९ बृहती । | 12 |
|---|
| सूक्त 63 | १२ प्रगाथ: काण्व:। इन्द्र:, १२ देवा: । गायत्री ; १,४-५,७ अनुष्टुप् ; १२ त्रिष्टुप् । | 12 |
|---|
| सूक्त 64 | १२ प्रगाथ: काण्व:। इन्द्र: । गायत्री । | 12 |
|---|
| सूक्त 65 | 1-12 १२ प्रगाथ: काण्व:। इन्द्र: । गायत्री । | 12 |
|---|
| सूक्त 67 | १५ कलि: प्रागाथ: । इन्द्र: । प्रगाथ:= ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ), १५ अनुष्टुप् । | 15 |
|---|
| सूक्त 68 | १९ प्रियमेध आङ्गिरस: । इन्द्र:; १४-१९ ऋक्षाश्वमेधौ । गायत्री , अनुष्टुम्मुख: प्रगाथ:= ( अनुष्टुप् + गायत्र्यौ ) १,४,७,१० अनुष्टुप् , १६ शंकुमती । | 19 |
|---|
| सूक्त 69 | १८ प्रियमेध आङ्गिरस: । इन्द्र:, ११ ( अर्धर्चस्य ) विश्वे देवा :, ११ ( उत्तरार्धस्य ) – १२ वरुण: । अनुष्टुप् , २ उष्णिक् ,४-६ गायत्री , ११,१६ पंक्ति:, १७- १८ बृहती । | 18 |
|---|
| सूक्त 70 | १५ पुरुहन्मा आङ्गिरस: । इन्द्र: । बृहती ; १-६ प्रगाथ: = ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) १२ शंकुमती, १३ उष्णिक् , १४ अनुष्टुप् , १५ पुरउष्णिक् । | 15 |
|---|
| सूक्त 71 | १५ सुदीति- पुरुमीळहावाङ्गिरसौ, तयोर्वान्यतर: । अग्नि: । गायत्री, १०-१५ प्रगाथ: = ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 15 |
|---|
| सूक्त 72 | १८ हर्यत: प्रागाथ: । अग्नि: हवींषि वा । गायत्री । | 18 |
|---|
| सूक्त 73 | १८ गोपवन आत्रेय: सप्तवध्रिर्वा । अश्विनौ ।गायत्री । | 18 |
|---|
| सूक्त 74 | १५ गोपवन आत्रेय: ।अग्नि:, १३-१५ आर्क्ष: श्रुतर्वा ।१-१२ अनुष्टुम्मुख: प्रगाथ:= ( अनुष्टुप् + गायत्र्यौ ) १३-१५ अनुष्टुप् । | 15 |
|---|
| सूक्त 75 | १६ विरूप आङ्गिरस: ।अग्नि: । गायत्री । | 16 |
|---|
| सूक्त 76 | १२ कुरुसुति: काण्व:। इन्द्र: ।गायत्री । | 12 |
|---|
| सूक्त 77 | ११ कुरुसुति: काण्व:। इन्द्र: ।गायत्री, १० -११ प्रगाथ:= ( बृहती, सतोबृहती) । | 11 |
|---|
| सूक्त 78 | १० कुरुसुति: काण्व:। इन्द्र: ।गायत्री, १० बृहती । | 10 |
|---|
| सूक्त 79 | ९ कृत्नुर्भार्गव: । सोम: ।गायत्री , ९ अनुष्टुप् । | 9 |
|---|
| सूक्त 80 | १० एकद्यूर्नौधस: । इन्द्र:, १० देवा: । गायत्री, १० त्रिष्टुप् । | 10 |
|---|
| सूक्त 81 | ९ कुसीदी काण्व:। इन्द्र: । गायत्री । | 9 |
|---|
| सूक्त 82 | ९ कुसीदी काण्व:। इन्द्र: । गायत्री । | 9 |
|---|
| सूक्त 83 | ९ कुसीदी काण्व:। विश्वे देवा: । गायत्री । | 9 |
|---|
| सूक्त 84 | ९ उशना काव्य: । अग्नि: ।गायत्री । | 9 |
|---|
| सूक्त 85 | ९ कृष्ण आङ्गिरस: । अश्विनौ ।गायत्री । | 9 |
|---|
| सूक्त 86 | ५ कृष्ण आङ्गिरस:, विश्वको वा कार्षि्ण:। अश्विनौ । जगती । | 5 |
|---|
| सूक्त 87 | ६ कृष्ण आङ्गिरसो, वासिष्ठो वा द्युम्नीक:, प्रियमेध आङ्गिरसो वा।अश्विनौ । प्रगाथ: = ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 6 |
|---|
| सूक्त 88 | ६ नोधा गौतम: । इन्द्र: । प्रगाथ: = ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 6 |
|---|
| सूक्त 89 | ७ नृमेध-पुरुमेधावाङ्गिरसौ । इन्द्र: । १-४ प्रगाथ: = ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । ५-६ अनुष्टुप् | 7 |
|---|
| सूक्त 90 | ६ नृमेध-पुरुमेधावाङ्गिरसौ । इन्द्र: । १-४ प्रगाथ: = ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 6 |
|---|
| सूक्त 91 | ७ आत्रेयी अपाला । इन्द्र: । अनुष्टुप् , १-२ पंक्ति: । | 7 |
|---|
| सूक्त 92 | ३३ श्रुतकक्ष: सुकक्षो वा आङ्गिरस: ।इन्द्र: । गायत्री , १ अनुष्टुप् । | 33 |
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| सूक्त 93 | ३४ सुकक्ष आङ्गिरस: । इन्द्र:, ३४ इन्द्र-ऋभवश्च । गायत्री । | 34 |
|---|
| सूक्त 94 | १२ बिन्दु: पूतदक्षो वा आङ्गिरस: । मरुत: । गायत्री । | 12 |
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| सूक्त 95 | ९ तिरश्चीराङ्गिरस: । इन्द्र: । अनुष्टुप् । | 9 |
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| सूक्त 96 | २१ तिरश्चीराङ्गिरसो, द्युतानो वा मारुत: । इन्द्र:, १४ इन्द्रामरुत: १५ इन्द्राबृहस्पती । त्रिष्टुप् , ४ विराट् , २१ पुरस्ताज्ज्योति: । | 21 |
|---|
| सूक्त 97 | १५ रेभ: काश्यप: । इन्द्र: । बृहती , १०, १३ अतिजगती, ११-१२ उपरिष्टाद्बृहती, १४ त्रिष्टुप् , १५ जगती । | 15 |
|---|
| सूक्त 98 | १२ नृमेध आङ्गिरस: । इन्द्र: । उष्णिक् ; ७, १०-११ ककुप् ; ९,१२ पुरउष्णिक् । | 12 |
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| सूक्त 99 | ८ नृमेध आङ्गिरस: । इन्द्र: । प्रगाथ: = ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती ) । | 8 |
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| सूक्त 100 | (१२) १-३, ६-१२ नेमो भार्गव:, ४-५ इन्द्र: । इन्द्र:, ८ सुपर्ण:, ९ वज्रो वा, १०-११ वाक् । त्रिष्टुप् , ६ जगती , ७-९ अनुष्टुप् । | 12 |
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| सूक्त 101 | १६ जमदग्निर्भार्गव: । मित्रावरुणौ , ५ मित्रावरुणादित्या:, ६आदित्या:, ७-८ अश्विनौ, ९-१० वायु:, ११-१२ सूर्य:, १३ उषा: सूर्यप्रभा वा, १४ पवमानः, १५-१६ गौ: । १-२ प्रगाथ: = ( बृहती, सतोबृहती ), ३ गायत्री , ४ सतोबृहती , ५-१३ प्रगाथ: = ( विषमा बृहती, समा सतोबृहती, ) १४-१६ त्रिष्टुप् । | 16 |
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| सूक्त 102 | २२ भार्गव: प्रयोग:, अग्निर्बार्हस्पत्य:, पावको वा, सहस: पुत्रौ गृहपति-यविष्ठौ तयोर्वान्यतर: । अग्नि: । गायत्री । | 22 |
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| सूक्त 103 | १४ सौभरि: काण्व: ।अग्नि:; १४ अग्नामरुत: । बृहती; ५ विराड्रूपा; ७,९,११,१३ सतोबृहती ; ८,१२ ककुप् ; १० ह्रसीयसी; १४ अनुष्टुप् । | 14 |
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